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आईजीयू की प्रो. सविता श्योराण को स्मार्ट एग्रो सिस्टम विकास हेतु एआईसीटीई से ₹33.40 लाख का शोध अनुदान।

Published on: 20 Jul 2026

*आईजीयू की प्रो. सविता श्योराण को स्मार्ट एग्रो सिस्टम विकास हेतु एआईसीटीई से ₹33.40 लाख का शोध अनुदान।*


इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर रेवाड़ी, के लिए गर्व का विषय है कि कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग से प्रो. सविता कुमारी श्योराण को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई), नई दिल्ली द्वारा प्रतिष्ठित रिसर्च प्रमोशन स्कीम (RPS) के अंतर्गत एक शोध परियोजना स्वीकृत की गई है। एआईसीटीई ने "स्मार्ट एग्रो सिस्टम डेवलपमेंट फॉर फार्मर्स" शीर्षक परियोजना के लिए ₹33.40 लाख की शोध अनुदान राशि स्वीकृत की है।

इस शोध परियोजना का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), स्मार्ट सेंसर, क्लाउड कंप्यूटिंग तथा डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए किसानों के लिए एक बुद्धिमान एवं तकनीक-संचालित कृषि प्रणाली विकसित करना है। यह प्रणाली फसल निगरानी, मिट्टी के स्वास्थ्य का आकलन, सिंचाई प्रबंधन, मौसम आधारित निर्णय तथा संसाधनों के कुशल उपयोग में किसानों की सहायता करेगी। प्रस्तावित प्रणाली से कृषि उत्पादकता में वृद्धि, उत्पादन लागत में कमी, जल संरक्षण तथा टिकाऊ एवं सटीक कृषि को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

इस उपलब्धि पर कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने प्रो. सविता श्योराण एवं कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग को बधाई देते हुए कहा कि एआईसीटीई द्वारा स्वीकृत यह परियोजना विश्वविद्यालय के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शोध एवं नवाचार के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि कृषि जैसी वास्तविक चुनौतियों पर आधारित शोध समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के साथ-साथ “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय भविष्य में भी शिक्षकों को बाह्य वित्तपोषित शोध परियोजनाओं के लिए प्रोत्साहित करता रहेगा।

कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया के माध्यम से एआईसीटीई का शोध अनुदान प्राप्त होना विश्वविद्यालय के शिक्षकों की शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं शोध क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना शिक्षा जगत, तकनीकी क्षेत्र एवं किसान समुदाय के बीच सहयोग को मजबूत करेगी तथा विद्यार्थियों को अत्याधुनिक शोध कार्यों से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगी।

अधिष्ठाता शैक्षणिक मामले प्रोफेसर सुनील कुमार ने भी प्रो. श्योराण को बधाई देते हुए कहा कि यह परियोजना विश्वविद्यालय के शोध वातावरण को और अधिक सुदृढ़ करेगी, अंतर्विषयी नवाचार को बढ़ावा देगी तथा विद्यार्थियों को एआई, आईओटी और स्मार्ट कृषि जैसी उभरती तकनीकों में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर देगी।

कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष प्रो. सतिंदर बल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना विभाग की शोध गतिविधियों को नई दिशा प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि इसके परिणाम न केवल किसान समुदाय के लिए लाभकारी होंगे, बल्कि विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को वास्तविक समस्याओं के तकनीकी समाधान विकसित करने का अवसर भी प्रदान करेंगे।

प्रो. सविता कुमारी श्योराण ने इस शोध परियोजना के लिए एआईसीटीई का आभार व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मिले निरंतर सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि यह परियोजना आधुनिक डिजिटल तकनीकों और किसानों की वास्तविक आवश्यकताओं के बीच की दूरी को कम करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसके माध्यम से एक किफायती, बुद्धिमान एवं उपयोगकर्ता-अनुकूल स्मार्ट एग्रो सिस्टम विकसित किया जाएगा, जो कृषि उत्पादकता बढ़ाने, संसाधनों के कुशल उपयोग, जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने तथा किसानों की आय और जीवन स्तर में सुधार लाने में सहायक सिद्ध होगा।

कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के सभी शिक्षकों ने भी प्रो. सविता श्योराण को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर बधाई दी तथा विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना विभाग में शोध संस्कृति को और अधिक मजबूत करेगी तथा भविष्य में अन्य बाह्य वित्तपोषित शोध परियोजनाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

एआईसीटीई द्वारा स्वीकृत यह परियोजना इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर की शोध यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो नवाचार, तकनीकी प्रगति तथा समाजोपयोगी अनुसंधान के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को और अधिक सशक्त बनाती है।